SHG से बदल रही गांव की महिलाओं की तस्वीर: 10 करोड़ महिलाएं जुड़ीं, 3.5 करोड़ बनीं 'लखपति दीदी'

SHG से बदल रही गांव की महिलाओं की तस्वीर: 10 करोड़ महिलाएं जुड़ीं, 3.5 करोड़ बनीं 'लखपति दीदी'

गांवों में कभी घर की चारदीवारी तक सीमित रहने वाली महिलाएं आज अपना कारोबार चला रही हैं, बैंक से लेन-देन कर रही हैं और परिवार की आमदनी में बड़ा योगदान दे रही हैं। इस बदलाव के पीछे स्वयं सहायता समूह (SHG) की बड़ी भूमिका है। दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के तहत देश में 90 लाख से ज्यादा समूहों से 10 करोड़ से अधिक ग्रामीण महिलाएं जुड़ चुकी हैं।

3.5 करोड़ 'लखपति दीदी'

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक करीब 3.5 करोड़ SHG सदस्य 'लखपति दीदी' बन चुकी हैं। लखपति दीदी उस महिला को कहा जाता है जिसके परिवार की सालाना आय कम से कम एक लाख रुपये हो और यह आय कम से कम चार फसल सीजन या कारोबारी चक्र तक लगातार बनी रहे। सरकार ने अब 6 करोड़ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा है।

किन कामों से हो रही कमाई

  • पशुपालन और डेयरी
  • सिलाई-कढ़ाई और हस्तशिल्प
  • मशरूम, सब्जी और बागवानी
  • अचार, पापड़ और खाद्य प्रसंस्करण
  • छोटी दुकान, ड्रोन दीदी और बैंक सखी जैसी सेवाएं

गांव की तस्वीर बदली

मध्य प्रदेश के नीमच समेत कई जिलों से ऐसी कहानियां सामने आ रही हैं, जहां समूह से जुड़कर महिलाओं ने छोटा कर्ज लेकर काम शुरू किया और आज वे दूसरों को भी रोजगार दे रही हैं। समूह की बैठकों से महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे पंचायत तथा सामाजिक फैसलों में भी आगे आ रही हैं। बच्चों की पढ़ाई और परिवार के स्वास्थ्य पर खर्च करने की उनकी क्षमता भी बढ़ी है।

कैसे जुड़ें समूह से

गांव की कोई भी महिला अपने पड़ोस की 10-12 महिलाओं के साथ मिलकर समूह बना सकती है। इसके लिए प्रखंड कार्यालय या राज्य आजीविका मिशन (जैसे बिहार में जीविका, झारखंड में JSLPS) से संपर्क किया जा सकता है। समूह को बैंक से आसान शर्तों पर कर्ज, प्रशिक्षण और बाजार से जोड़ने में मदद मिलती है।